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गज़ल 2/ एक जिंदा को

हर एक जिंदा को नशे में चूर देखा ।
मौत में सबको बहुत मजबूर देखा ।।

ख्वाहिशों  के आसमाँ के, जमी में
दफ्न  होने  का  वही  दस्तूर देखा ।

रिश्ते  करीब लगते हैं बस अंधेरे में
उजाले मेें तो अपने भी,थे दूर,देखा ।

जिंदगी बेशक बहुत ही खूबसूरत है
जब किसी ने जी इसे भरपूर देखा।

खाक मेें  मिलती  नहीं    ये जिंदगी
खाक में भी गर खुदा का नूर देखा।


------21 फरवरी 2018
         वास्को दा गामा






Comments

  1. This comment has been removed by a blog administrator.

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    1. Sorry your valued comments deleted erroneously

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  2. Nice one sir, I didn't know you write poems also. Will be waiting for your next poem now 👌

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  3. Nice one sirji... Extra talent didn't know before

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  4. आपको पढ़ना अभी शुरू किया है ,धीरे धीरे आपका रंग चढ़ रहा है

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    1. बहुत अच्छा लगा जानकर। और भी रचनाएं पोस्ट करूंगा । आप इस लिंक पर भी जाएं https://merihindirachanayen.blogspot.in इसपे आत्मगीत मिलेंगे । इसे भी पढ़ें ।

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