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गज़ल 28 / तोड़कर दीवार भी

तोड़कर   दीवार    भी  तो  देखते।
आ  जरा  इस पार  भी  तो  देखते।।

ख्वाब  उतरेंगे  जमी  पर  एक  दिन
होश  में  इक  बार  भी  तो  देखते।

यूं नहीं कहते कि  दिल को रख बड़ा
प्यार   का  आकार  भी  तो  देखते।

गहन  भीतर  शांति  में  जब बैठ तू
उमड़ता  यह  ज्वार भी  तो  देखते।

ठूंठ   पर  चिड़ियां   बनातीं  घोंसले
काल   की ये  मार  भी  तो  देखते।

आंत का भूगोल  जब  भी  खींच तू
भूख   का  विस्तार  भी  तो  देखते।

लोग   टंगे    हैं    हवा   में   यूं  नहीं
कौन   है   सरकार   भी  तो  देखते।

दर्श  इतने  गीत - गजलें   क्या  करो
जा   कहीं   बाज़ार  भी  तो  देखते।

-----24 मई 2018, वास्को दा गामा, गोवा ।
2122 2122  212 

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