कत्ल होता चौक पे सच के सिपाही का।
उधर गाता राग कातिल बेगुनाही का।।
शब्द कल मारा गया, अब क्या करोगे भी
मौन लेकर चश्मदीदों की गवाही का ?
जंगल उगाता सिर्फ चल, ये पूछ मत कोई
पर्यावरण किसने बिगाड़ा लोकशाही का।
बहुत कोशिश हुई लेकिन आँकड़ों में, है
हो न पाया तर्जुमा उनकी तबाही का।
देख लेना सरहदों पे गांव या खाली मकां
आएगा मतलब समझ में बेपनाही का।
मछलियाँ छोटी मरें पर मोटियां मस्ती करें
जाल इक ऐसा लगा भी है उगाही का।
थके-प्यासे ख्वाब कोई मर नहीं जाएं कहीं
पानी पिला दे दर्श तू अपने सुराही का।
---29 मई 2018 , गोवा।
उधर गाता राग कातिल बेगुनाही का।।
शब्द कल मारा गया, अब क्या करोगे भी
मौन लेकर चश्मदीदों की गवाही का ?
जंगल उगाता सिर्फ चल, ये पूछ मत कोई
पर्यावरण किसने बिगाड़ा लोकशाही का।
बहुत कोशिश हुई लेकिन आँकड़ों में, है
हो न पाया तर्जुमा उनकी तबाही का।
देख लेना सरहदों पे गांव या खाली मकां
आएगा मतलब समझ में बेपनाही का।
मछलियाँ छोटी मरें पर मोटियां मस्ती करें
जाल इक ऐसा लगा भी है उगाही का।
थके-प्यासे ख्वाब कोई मर नहीं जाएं कहीं
पानी पिला दे दर्श तू अपने सुराही का।
---29 मई 2018 , गोवा।
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