बहुत भींगता है
बारहोमास
तुम्हारा कोना
बस दे दो तुम
अपना सारा रोना
जो तुम्हारे कोने को
करता आया है
रखता आया है गीला सदा
मत दो मुझे
अपना वह कोना
बस दे दो तुम अपना सारा रोना
बहुत धूप, बहुत सुखाड़ है
मेरे बंजर कोने में
सदियों से
एक दरार है
रिक्तता प्रगाढ़ है
मैं कभी रोया नहीं
क्योंकि मैं रो नहीं सकता
जबतक कि मैं हो नहीं सकता
और मैं हूँ नहीं
यह सिर्फ और सिर्फ मुझे ही ज्ञात है
यह अजीब -सी बात है।
इसलिए दे दो तुम
अपना सारा रोना
समझ सकूं
कर सकूं महसूस
कि पानी कितना जरूरी है
जीने के लिए
कितना जरूरी है अपने कोने का गीला होना
उसे निचोड़कर पीने के लिए
इसलिए दे दो मुझे
अपना सारा रोना
तुम्हें भी महसूस हो
बंजर , धूप, सुखाड़....
अगर जारी रहे लगातार ...
कैसे बन जाती है मिट्टी भी ढेला
अनुर्वर पाषाण
फोड़ना होता नहीं आसान
तब तोड़ना ।
कुछ भी बचता नहीं है शेष
होने के लिए
या फिर कैसे तरसता है मन
रोने के लिए
कर सको महसूस तुम भी ।
---दिलीप कुमार दर्श
----04/05/2018
बारहोमास
तुम्हारा कोना
बस दे दो तुम
अपना सारा रोना
जो तुम्हारे कोने को
करता आया है
रखता आया है गीला सदा
मत दो मुझे
अपना वह कोना
बस दे दो तुम अपना सारा रोना
बहुत धूप, बहुत सुखाड़ है
मेरे बंजर कोने में
सदियों से
एक दरार है
रिक्तता प्रगाढ़ है
मैं कभी रोया नहीं
क्योंकि मैं रो नहीं सकता
जबतक कि मैं हो नहीं सकता
और मैं हूँ नहीं
यह सिर्फ और सिर्फ मुझे ही ज्ञात है
यह अजीब -सी बात है।
इसलिए दे दो तुम
अपना सारा रोना
समझ सकूं
कर सकूं महसूस
कि पानी कितना जरूरी है
जीने के लिए
कितना जरूरी है अपने कोने का गीला होना
उसे निचोड़कर पीने के लिए
इसलिए दे दो मुझे
अपना सारा रोना
तुम्हें भी महसूस हो
बंजर , धूप, सुखाड़....
अगर जारी रहे लगातार ...
कैसे बन जाती है मिट्टी भी ढेला
अनुर्वर पाषाण
फोड़ना होता नहीं आसान
तब तोड़ना ।
कुछ भी बचता नहीं है शेष
होने के लिए
या फिर कैसे तरसता है मन
रोने के लिए
कर सको महसूस तुम भी ।
---दिलीप कुमार दर्श
----04/05/2018
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