आओ ढूंढते हैं हम सब
आज मातृ -दिवस को
इसमें मां कितनी है और कितना दिवस है
क्योंकि मुझे लगता है ऐसा
गायब है माता
और रह गया है सिर्फ दिवस
पूरे साल में परिचालित करते हैं हम सब
सिर्फ एक बार
जैसे कोई बैंक -खाता
ताकि रहे जीवित अगले दिवस तक ।
आओ ढूंढें यह भी
कि हम संतान हैं?
या फिर उनकी कोख और छाती से
खोद निकालते हैंं जीवन और संसाधन
चूसते हैं अमृत
घर भरते हैं अपना
और मां रह जाती है अकेली
उस परित्यक्त खदान की तरह
अयस्क -शून्य
और हम बन जाते हैं
बिल्कुल उत्तर आधुनिक संतान की तरह
रह जाते हैं इसी दिवस के लिए
जो रात से भी काला दिखता है मुझे
गंगा नहीं
सूखता हुआ नाला दिखता है मुझे ।
13/05/2018
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