आत्मा पर बर्फ थोड़ी डाल देता।
सड़न की संभावना तू टाल देता।।
लोग फंसने को यहाँ तैयार बैठे
सिखा कोई फेंकना भी जाल देता।
आंखें अगर न देखती सच आज का
जुबां अपनी भी जरा संभाल लेता।
एक ही था डूब वो भी गया सूरज
काश ! कि इक और पहले बाल लेता।
थार का एहसास गर होता न आंखों में
ख्वाब को हिरनी समझके पाल लेता।
मंच पर है नाचना सबको अकेला
नेपथ्य में कोई नहीं जो ताल देता।
दर्श गर तू सीख लेता गज़लगोई भी
स्वयं को अपने मुताबिक ढाल लेता।
-----25 मई 2018, गोवा।
सड़न की संभावना तू टाल देता।।
लोग फंसने को यहाँ तैयार बैठे
सिखा कोई फेंकना भी जाल देता।
आंखें अगर न देखती सच आज का
जुबां अपनी भी जरा संभाल लेता।
एक ही था डूब वो भी गया सूरज
काश ! कि इक और पहले बाल लेता।
थार का एहसास गर होता न आंखों में
ख्वाब को हिरनी समझके पाल लेता।
मंच पर है नाचना सबको अकेला
नेपथ्य में कोई नहीं जो ताल देता।
दर्श गर तू सीख लेता गज़लगोई भी
स्वयं को अपने मुताबिक ढाल लेता।
-----25 मई 2018, गोवा।
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