पूछ मत कि क्या लिखी है।
जो लिखी उनकी लिखी है।।
शब्द उनके, भाव उनके
कुछ नहीं अपनी लिखी है।।
सर्जना बाजार में फिर
पूछ मत किसकी बिकी है।।
समय के हाथों बिचारी
लेखनी, सबकी बिकी है ।।
तोड़ कंठी और माला
बेवजह तू क्यों दुखी है।।
देख, तेरा वो पड़ोसी
सीख ले कुछ क्यों सुखी है।।
उम्मीद ही होगी कदाचित्
दूर से जो भी दिखी है।।
पास तो है एक खाली
बाँसुरी जो अनफुंकी है।।
-------- 22 मई 2018.
जो लिखी उनकी लिखी है।।
शब्द उनके, भाव उनके
कुछ नहीं अपनी लिखी है।।
सर्जना बाजार में फिर
पूछ मत किसकी बिकी है।।
समय के हाथों बिचारी
लेखनी, सबकी बिकी है ।।
तोड़ कंठी और माला
बेवजह तू क्यों दुखी है।।
देख, तेरा वो पड़ोसी
सीख ले कुछ क्यों सुखी है।।
उम्मीद ही होगी कदाचित्
दूर से जो भी दिखी है।।
पास तो है एक खाली
बाँसुरी जो अनफुंकी है।।
-------- 22 मई 2018.
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