एक दलदल में फंसा हूं इन दिनों।
और भी लगता धंसा हूँ इन दिनों।।
हो रहा चढ़ना - उतरना इस कदर
महसूस होता है नशा हूं इन दिनों।
चढ़ गया सिर कौन पागलपन मेरे
बेवजह कितना हंसा हूं इन दिनों।
रस्सियों -सी बांधती हैं कुछ मुझे
महसूस होता है कसा हूं इन दिनों।
दर्श मुझको ढूंढ मत बाहर कहीं
देख रग - रग में बसा हूँ इन दिनों।
-----३० मई २०१८
वास्को दा गामा, गोवा ।
और भी लगता धंसा हूँ इन दिनों।।
हो रहा चढ़ना - उतरना इस कदर
महसूस होता है नशा हूं इन दिनों।
चढ़ गया सिर कौन पागलपन मेरे
बेवजह कितना हंसा हूं इन दिनों।
रस्सियों -सी बांधती हैं कुछ मुझे
महसूस होता है कसा हूं इन दिनों।
दर्श मुझको ढूंढ मत बाहर कहीं
देख रग - रग में बसा हूँ इन दिनों।
-----३० मई २०१८
वास्को दा गामा, गोवा ।
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