आसमाँ में इस तरह छाया हुआ हूँ।
जमी से ही भाप बन आया हुआ हूँ ।।
आदमी मैं आम हूं हर बार सदियों से,
सोया नहीं हूं ख्वाब में सुलाया गया हूँ।
सांस भी मुझको डराती खूब अब तो
मैं हवा से इस कदर हिलाया गया हूँ।
तोड़ना मुझको नहीं आसान इतना है
वो घड़ा हूं, चोट से पकाया गया हूँ।
कुछ नया लगता नहीं आके यहाँ भी,
यहां कितनी बार मैं आया गया हूँ ।
इस बार भी खोना नहीं ऐ मीत मुझको
गर बड़ी मुश्किल से मैं पाया गया हूँ ।
----'19th February 2018
Vasco Da Gama Goa.
जमी से ही भाप बन आया हुआ हूँ ।।
आदमी मैं आम हूं हर बार सदियों से,
सोया नहीं हूं ख्वाब में सुलाया गया हूँ।
सांस भी मुझको डराती खूब अब तो
मैं हवा से इस कदर हिलाया गया हूँ।
तोड़ना मुझको नहीं आसान इतना है
वो घड़ा हूं, चोट से पकाया गया हूँ।
कुछ नया लगता नहीं आके यहाँ भी,
यहां कितनी बार मैं आया गया हूँ ।
इस बार भी खोना नहीं ऐ मीत मुझको
गर बड़ी मुश्किल से मैं पाया गया हूँ ।
----'19th February 2018
Vasco Da Gama Goa.
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