लिखा पत्थर पे किसी ने,सवाल दुबारा क्यूं है?
बीच मेें दरिया, दोनों तरफ किनारा क्यूं है ?
बस देखते ही तुम्हें समझा था ये मैंने ,
हर शख्स का चांद की तरफ इशारा क्यूं है ।
आसमाँ में है उजाला, छत नहाई धूप में ,
मगर नीचे रात का, स्याह -सा नज़ारा क्यूं है ?
कर दिया था वक्त ने खामोश ही जिसको सदा,
आवाज मेें उसकी किसी ने मुझे पुकारा क्यूं है?
हाथ सेंके रात भर सभी ने तेरे घर जले में
हर तरफ चर्चा सुबह सिर्फ हमारा क्यूं है ?
पसे पर्दा कोई समुंदर उमड़ता है वही सब में ,
हर आंख से निकला वो पानी खारा क्यूं है ?
----18feb 2018
वास्को द गामा, गोवा ।
Comments
Post a Comment