मैंने ये ही सीखे, जीके,
कुछ मीठे , कुछ तीखे,
मीठे को चख ,तीखे में तुम चीखे,
इसीलिए भख ,जीभर पहले तीखे
जीके, मैंने ये ही सीखे ।
पहले निज, फिर पर-पूरक हो,
भव-हालाहल पीके
अमृत का अधिकारी तब तू
नीलकंठ भी फीके ;
जीके, मैंने ये ही सीखे ।
--------फिर याद आई कॉलेज के दिनों की कविता --
कुछ मीठे , कुछ तीखे,
मीठे को चख ,तीखे में तुम चीखे,
इसीलिए भख ,जीभर पहले तीखे
जीके, मैंने ये ही सीखे ।
पहले निज, फिर पर-पूरक हो,
भव-हालाहल पीके
अमृत का अधिकारी तब तू
नीलकंठ भी फीके ;
जीके, मैंने ये ही सीखे ।
--------फिर याद आई कॉलेज के दिनों की कविता --
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