कहा सबने - वाह ! क्या खूब लिखा।
जब सब तरफ तूने वही महबूब लिखा।।
अकेले, वक्त के इस भयानक जंगल में
बेखौफ, तूने खुद को महफूज लिखा।
आँधियों की खाक को पत्थर समझके
क्या खूब उसपे खुद का वजूद लिखा।
छिन गए कागद,कलम भी हाथ से जब
आसमाँ में उँगलियों से खूब लिखा।
इक अदद दुनिया कहीं है खूब भीतर
जो लिखा तूने उसी में डूब लिखा।
कौन समझे मौन वे गहरे इशारे भी
कबीरा की तरह तूने वही बेबूझ लिखा।
लिखा लिखा आह भर क्या खूब लिखा।
जो नहीं था उसे भी मौजूद लिखा।।
19th February 2018
वास्को दा गामा, गोवा ।
जब सब तरफ तूने वही महबूब लिखा।।
अकेले, वक्त के इस भयानक जंगल में
बेखौफ, तूने खुद को महफूज लिखा।
आँधियों की खाक को पत्थर समझके
क्या खूब उसपे खुद का वजूद लिखा।
छिन गए कागद,कलम भी हाथ से जब
आसमाँ में उँगलियों से खूब लिखा।
इक अदद दुनिया कहीं है खूब भीतर
जो लिखा तूने उसी में डूब लिखा।
कौन समझे मौन वे गहरे इशारे भी
कबीरा की तरह तूने वही बेबूझ लिखा।
लिखा लिखा आह भर क्या खूब लिखा।
जो नहीं था उसे भी मौजूद लिखा।।
19th February 2018
वास्को दा गामा, गोवा ।
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