पूरी तरह जब मूल से उखड़ा हुआ हूँ।
महसूस होता ठूँठ -सा अकड़ा हुआ हूँ।।
बहुत खुश था कभी रिश्तों के समुंदर में
रेत पर हूँ, सभी से बिछड़ा हुआ हूँ।
तुम्हें लगती जिंदगी मेरी सजी - संवरी
देख आके , किस कदर बिखरा हुआ हूँ।
जिंदगी यह हो गई है एक मैराथन यहाँ
दौड़ता हूं खूब, महसूसता ठहरा हुआ हूँ।
खो गई मेरी जमी आकाश छूने में ,
चोटियां भी चढ़ बहुत पिछड़ा हुआ हूँ।
रोज नीचे बह रही है जिंदगी गहरी
एक पुल - सा मैं तना ठहरा हुआ हूँ।
क्या करूं कोई शिकायत भी जमाने से
अगर खुद का ही बना-बिगड़ा हुआ हूँ।
--------26 फरवरी 2018
वास्को दा गामा , गोवा ।
--------26 फरवरी 2018
वास्को दा गामा , गोवा ।
महसूस होता ठूँठ -सा अकड़ा हुआ हूँ।।
बहुत खुश था कभी रिश्तों के समुंदर में
रेत पर हूँ, सभी से बिछड़ा हुआ हूँ।
तुम्हें लगती जिंदगी मेरी सजी - संवरी
देख आके , किस कदर बिखरा हुआ हूँ।
जिंदगी यह हो गई है एक मैराथन यहाँ
दौड़ता हूं खूब, महसूसता ठहरा हुआ हूँ।
खो गई मेरी जमी आकाश छूने में ,
चोटियां भी चढ़ बहुत पिछड़ा हुआ हूँ।
रोज नीचे बह रही है जिंदगी गहरी
एक पुल - सा मैं तना ठहरा हुआ हूँ।
क्या करूं कोई शिकायत भी जमाने से
अगर खुद का ही बना-बिगड़ा हुआ हूँ।
--------26 फरवरी 2018
वास्को दा गामा , गोवा ।
--------26 फरवरी 2018
वास्को दा गामा , गोवा ।
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