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गज़ल 10/ आज फिर से बादलों ने



आज  फिर  से  बादलों ने  इस  जमी की बात की।
जब  हवा  ने  दी  खबर,  गरमागरम   हालात की।।

जख्म  पे  चर्चा  चली  थी  देर   तक  चारों  तरफ
मगर मरहम की  किसी  ने भी  नहीं कुछ बात की।

घर- घर   उजाले -धूप का  जिम्मा लिया तूने मगर
लाया कहां सूरज कभी भी सिर्फ उसकी बात की ?

खेत  में  जाके  वहां  भी   पूछ   फसलों  से  कभी
क्यों किसानों  ने  हमेशा  खुदकुशी   की बात की।

आम लोगों से जुड़ा जब भी कभी  उछला  सवाल
बात  बनकर  रह गया  हर  बार  वो  जज्बात की।

बोझ  सीने  में  लिए  सब  खड़े  होकर हांफते  थे
जी  मेरा  हल्का  हुआ  जब  खूब  सबसे बात की।

खूब  आएगा  उजाला   कल   सुबह  सबके  लिए
ये  खबर  सुन  कौन  लेता भी खबर  इस रात की ?

खुल गया है  भेद  बादल !  तेरे   बरसने  का  सही
जमी   से  पानी  लिया  फिर जमी  पे  बरसात की।


        ----28 फरवरी 2018,

            वास्को दा गामा, गोवा ।
























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