हर एक जिंदा को नशे में चूर देखा ।
मौत में सबको बहुत मजबूर देखा ।।
ख्वाहिशों के आसमाँ के, जमी में
दफ्न होने का वही दस्तूर देखा ।
रिश्ते करीब लगते हैं बस अंधेरे में
उजाले मेें तो अपने भी,थे दूर,देखा ।
जिंदगी बेशक बहुत ही खूबसूरत है
जब किसी ने जी इसे भरपूर देखा।
खाक मेें मिलती नहीं ये जिंदगी
खाक में भी गर खुदा का नूर देखा।
------21 फरवरी 2018
वास्को दा गामा
मौत में सबको बहुत मजबूर देखा ।।
ख्वाहिशों के आसमाँ के, जमी में
दफ्न होने का वही दस्तूर देखा ।
रिश्ते करीब लगते हैं बस अंधेरे में
उजाले मेें तो अपने भी,थे दूर,देखा ।
जिंदगी बेशक बहुत ही खूबसूरत है
जब किसी ने जी इसे भरपूर देखा।
खाक मेें मिलती नहीं ये जिंदगी
खाक में भी गर खुदा का नूर देखा।
------21 फरवरी 2018
वास्को दा गामा
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ReplyDeleteSorry your valued comments deleted erroneously
DeleteNice one sir, I didn't know you write poems also. Will be waiting for your next poem now 👌
ReplyDeleteThanks Dhirajji...
ReplyDeleteNice one sirji... Extra talent didn't know before
ReplyDeleteआपको पढ़ना अभी शुरू किया है ,धीरे धीरे आपका रंग चढ़ रहा है
ReplyDeleteबहुत अच्छा लगा जानकर। और भी रचनाएं पोस्ट करूंगा । आप इस लिंक पर भी जाएं https://merihindirachanayen.blogspot.in इसपे आत्मगीत मिलेंगे । इसे भी पढ़ें ।
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