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गज़ल 1/ बात हो दिल की

बात हो  दिल की,   हिसाब हो कैसे ?
खुली आँखों में कोई ख्वाब हो जैसे।।

तुम्हें आदत हो  गई है शिकायत की
तुम्ही अच्छे,  बाकी  खराब हो जैसे।

तेरी परछाइयों  के  डर का असर है,
छुप गया मेघ में  आफताब हो जैसे।

मन की  बातें  कहां  जाकर सुनाऊं
इक  आप  ही  हो  जनाब, हो जैसे।

जिस अदा से मुझे  नाचीज समझा
वो  अदा  भी  तेरी, अदाब हो जैसे।

हवा के  रुख  का  जो इंतजार करे
उसके  हाथों में  इन्कलाब हो कैसे ?

22 फरवरी 2018
वास्को दा गामा , गोवा ।





Comments

  1. हवा के रुख का जो ........क्या ख़ूब कहा

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