रुख हवा का, समय पर पहचान लेता।
कामयाबी के सभी गुर जान लेता।।
अच्छे - बुरे में फर्क का पक्का पता होता
इक बार भी दिल का कहा गर मान लेता।
इतनी बुरी हालत कभी होती नहीं तेरी
शुरू से थोड़ा अगर तू ध्यान देता।
झोलियां ही ले खड़े छोटी-बड़ी थे लोग जब
कैसे बराबर बांटकर भगवान् देता ?
प्यार जीते-जी जरा -सा और जाते वक्त कंधे,
और क्या इंसान को इंसान देता ?
खुद बना सकता अगर था रास्ता खुद के लिये
खामखा क्यों और का एहसान लेता ?
दर्श कड़वी नहीं होती गज़ल तेरी भी कभी
काढ़ा जरा - सा गुड़ मिलाकर छान लेता।
-----1जून 2018,
वास्को दा गामा, गोवा।
कामयाबी के सभी गुर जान लेता।।
अच्छे - बुरे में फर्क का पक्का पता होता
इक बार भी दिल का कहा गर मान लेता।
इतनी बुरी हालत कभी होती नहीं तेरी
शुरू से थोड़ा अगर तू ध्यान देता।
झोलियां ही ले खड़े छोटी-बड़ी थे लोग जब
कैसे बराबर बांटकर भगवान् देता ?
प्यार जीते-जी जरा -सा और जाते वक्त कंधे,
और क्या इंसान को इंसान देता ?
खुद बना सकता अगर था रास्ता खुद के लिये
खामखा क्यों और का एहसान लेता ?
दर्श कड़वी नहीं होती गज़ल तेरी भी कभी
काढ़ा जरा - सा गुड़ मिलाकर छान लेता।
-----1जून 2018,
वास्को दा गामा, गोवा।
Comments
Post a Comment