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कविता / 19 / कल एक नदी

कल एक नदी बहाई उसने
और किनारे पर मुझे खड़ा किया
आज जब उसने कहा कि मैं जिंदा हूं
मैं नदी में उतरा
और लगा मैं डूब रहा हूँ ...
डूब... ही गया बस

अब जब ऊपर उतराया
नदी ने कहा -शाबाश ! तुम मरे
सचमुच सफलतापूर्वक
कल देखना
मैं भी नहीं रहूंगी
रहेगी बस मेरी पथरीली छाती
उसपर पड़ा रहेगा तुम्हारा मृत शरीर
तबतक
जबतक कोई फिर मुझे नहीं बहाता
और फिर तुम्हें खड़ा नहीं करता
वहां एक किनारे पर...

यही सिलसिला है
खड़ा होना किनारे पर
डूबना उतराना अनवरत
इसलिए ऐसा किया मैंने
उसने कहा ......

             ७ जून २०१८


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