मैंने देखा
हिमालय उसकी गरम कांख में
दबा, धीरे-धीरे पिघल रहा है
कांख से चू रहा पानी
बहुत चिकनी सड़क पर
और वह आदमी फिसल रहा है
गिरते हुए वह कहता है
शायद समय बदल रहा है....
मैंने देखा
वह बामुश्किल संभल रहा है..
------७ जून २०१८
वास्को द गामा, गोवा ।
गाओ नहीं, सुनो सुर मेें तो कविता आती है। ---दिलीप कुमार दर्श
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