जहां कहीं भी है
संभावना जीवन की थोड़ी -सी भी
वहां जीवन है अवश्य
मोह कह लो
संभावना जीवन की थोड़ी -सी भी
वहां जीवन है अवश्य
मोह कह लो
या जीने की हूब
उग ही जाती है दूब
पत्थर पर भी पसार देती है
हरियाली छिटपुट
जहां कहीं मिट्टी -पानी का
स्पर्श है थोड़ा भी
और है छीजती हुई भी धूप
या कंजूस हवा
जड़ता तोड़
आवरण को फोड़
बीज के सहस्रार से
जड़ता तोड़
आवरण को फोड़
बीज के सहस्रार से
सदा आना ही चाहता है जीवन बाहर
उर्ध्व उठना ही चाहता है रस सदा
उर्ध्व उठना ही चाहता है रस सदा
मूल -आधार से
जहां कहीं भी संभावना के अग्नि - कण हैं
बीज फूटेगा सदा , रहस्य टूटेगा
उस अटूट विराट् उर्जा का
उसके सघन विस्तार
अनंत अंतर्व्याप्ति में
ये अग्नि -कण बुझते नहीं,
अथक हर एक पल
उड़ते रहेंगे
उस क्षितिज की ओर
अनंत अनंत की यात्रा पर....
जहां सूरज प्रकट ही है सदा
इसलिये
कभी नहीं होगा खत्म यह जीवन !
---०८/०६/२०१८ , गोवा ।
जहां कहीं भी संभावना के अग्नि - कण हैं
बीज फूटेगा सदा , रहस्य टूटेगा
उस अटूट विराट् उर्जा का
उसके सघन विस्तार
अनंत अंतर्व्याप्ति में
ये अग्नि -कण बुझते नहीं,
अथक हर एक पल
उड़ते रहेंगे
उस क्षितिज की ओर
अनंत अनंत की यात्रा पर....
जहां सूरज प्रकट ही है सदा
इसलिये
कभी नहीं होगा खत्म यह जीवन !
---०८/०६/२०१८ , गोवा ।
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