कौन- सी धूल ये चारों तरफ छाई हुई है ।
जमीनी बात ही जैसे कि हवाई हुई है।।
देखनी है तो नज़र और पैनी कर लो
ये जो तस्वीर है अंधेरों में खिंचाई हुई है ।
और भी भरके आई हैं फसलें उसमें,
धूप से मेरी मिट्टी की जो सिंचाई हुई है।
कितने छोटे लगते हो तुम यहाँ से अब
मुझे हासिल ये जबसे ऊंचाई हुई है।
जमीनी बात ही जैसे कि हवाई हुई है।।
देखनी है तो नज़र और पैनी कर लो
ये जो तस्वीर है अंधेरों में खिंचाई हुई है ।
और भी भरके आई हैं फसलें उसमें,
धूप से मेरी मिट्टी की जो सिंचाई हुई है।
कितने छोटे लगते हो तुम यहाँ से अब
मुझे हासिल ये जबसे ऊंचाई हुई है।
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