Skip to main content

गज़ल 7/आसमां में झाग बाक़ी

आसमां  में   झाग बाक़ी ।
है  जमीं  पर  दाग बाक़ी ।।

आंख  का  पानी  संभालो
और  भी  है  आग बाक़ी ।

कैद  मत   कर  ये  बहारें
और  भी है   बाग  बाक़ी ।

फक्त   रोटी  खा  रहे   वे
है  बची  क्या  साग बाक़ी ?

गुणा  खुशियों  का  हुआ
अब दर्द का है भाग बाक़ी ।

'दर्श'  गाता  है  उसे  जो
अनछुआ  है  राग  बाक़ी ।

Comments

  1. यह कविता उन दिनो की है जब मैं भागलपुर में रहता था।

    ReplyDelete

Post a Comment