वहाँ दिन - रात क्यों कड़ा पहरा था ?
राज था शायद कोई, बड़ा गहरा था ।।
कुछ लिखा था वहाँ काले अक्षरों में
दूर से दिखता मगर क्यूँ सुनहरा था ?
वे जानें, जो वहाँ रुके थे सदियों से
मैं तो सिर्फ रात भर वहां ठहरा था।
सत्य धुंधला नहीं होता है कभी-भी,
तेरी आँखों में ही तो घना कुहरा था ।
ऐसे ही तूफ़ां नहीं है हुआ मद्धिम
बीच सीने से मेरे वो अभी गुजरा था ।
प्रश्न उठ गिरता गया खूब उल्का- सा
थी जमीं गूंगी , आकाश बहरा था।
------8 February 2018
-------VASCO DA GAMA , GOA.
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