कल वो फिर मुझसे जब जुदा होगा ।
मेरे ही पास नहीं मेरा खुदा होगा ।।
मुझे मालूम है कि है तू अवारा हवा,
आज ये घर है, कल दूसरा होगा।
जब कभी आओगे तो मैं हूंगा नहीं
नाम मेरा वहां दीवार पे खुदा होगा।
वक्त जिद्दी था पैदाइशी , बच्चों सा ,
रोकने से भी , क्या वो रुका होगा?
मेरे हिस्से का अंधेरा सब मुझे दे दो
अब तो कंधा तेरा भी दुखा होगा ।
रोशनी कम थी धुआं ही ज्यादा था,
खुद में घुट- घुटके दीया बुझा होगा ।
वक्त! बरसा नहीं और पानी मुझपे,
जख्म फिर वरना, मेरा हरा होगा ।
सर झुका तूने बहुत सिज्दे किये
सर झुकाने से क्या सर गिरा होगा?
------------11 मार्च 2018
वास्को दा गामा, गोवा ।
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