तंग गलियों में कहीं खोया हुआ - सा।
शहर है जैसे यहाँ सोया हुआ - सा।।
कौन लाएगा खबर भी होश की देखो
रुख सभी का नशे में धोया हुआ - सा।
ख्वाब जैसे रेत बनकर रह गया फिर
आदमी है ख्वाब में बोया हुआ - सा।खेत बंजर था पड़ा सुनसान वीरां में
एक पुतला था खड़ा रोया हुआ - सा।
जिंदगी देती रही कंधा भरोसे का
और रिश्ता भी रहा ढोया हुआ - सा।
------०९/०७/२०१८ , गोवा।
------०९/०७/२०१८ , गोवा।
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