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गजल / 37 / तंग गलियों में कहीं


तंग गलियों में कहीं खोया हुआ - सा।
शहर है  जैसे  यहाँ  सोया हुआ - सा।।

कौन लाएगा खबर भी होश की देखो
रुख सभी का नशे में धोया हुआ - सा।

ख्वाब जैसे रेत बनकर  रह गया फिर
आदमी है  ख्वाब में बोया हुआ - सा।

खेत बंजर था पड़ा  सुनसान वीरां में
एक पुतला था खड़ा रोया हुआ - सा।

जिंदगी  देती  रही  कंधा  भरोसे  का 
और रिश्ता भी रहा  ढोया हुआ - सा।


------०९/०७/२०१८ , गोवा।



































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