मुद्दा अब अंधेरा नहीं
कहीं नहीं है अंधेरा
डूबता नहीं है सूरज अब
कभी कहीं
रात आती होगी शायद नींद में
और शाम तो जैसे
सदी का सबसे बड़ा झूठ
अन्यथा हुआ ही रहता है सबेरा
...
गाओ नहीं, सुनो सुर मेें तो कविता आती है। ---दिलीप कुमार दर्श