मुद्दा अब अंधेरा नहीं
कहीं नहीं है अंधेरा
डूबता नहीं है सूरज अब
कभी कहीं
रात आती होगी शायद नींद में
और शाम तो जैसे
सदी का सबसे बड़ा झूठ
अन्यथा हुआ ही रहता है सबेरा
...
खिलना भूल जाने के पहले
… ढूंढ़ो, ढूंढ़ो और ढूंढ़ो
कहां हूं मैं
अगर नहीं हूँ
जमीन में, आकाश में
पानी में, हवा - बतास में
आग में या वहाँ इडेन के बाग में,
पहाड़ में, जंगल क...